अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस और एसआईटी (SIT) की टीम ने 90 दिनों की तय समय सीमा के भीतर अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। 73 हजार 480 पन्नों की यह विशालकाय चार्जशीट चार बड़े बक्सों में भरकर कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश की गई।

एसआईटी में शामिल बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह और सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी पुलिस बल के साथ कोर्ट पहुंचे। हालांकि, इसकी भनक मिलते ही अधिवक्ताओं ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वकीलों का तर्क था कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले उनकी ओर से दी गई आपत्ति पर सुनवाई होनी चाहिए थी।
ट्रस्ट पदाधिकारियों को मिली क्लीन चिट, 105 चोरी की वारदातें दर्ज पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में किसी नए आरोपी का नाम नहीं जोड़ा गया है और न ही किसी पुराने आरोपी को हटाया गया है। मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों—रामशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव की संलिप्तता पूरी तरह स्पष्ट बताई गई है। इसमें अनुकल्प मिश्र को मुख्य साजिशकर्ता दर्शाया गया है।
चार्जशीट की सबसे खास बात यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंककर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई है। पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव को पुलिस ने सरकारी गवाह बनाया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावा चोरी की 105 अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जिनके आधार पर 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।







