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हिमाचल प्रदेश: देहरा में शुरू होगा देश का पहला ओजोन-आधारित पेयजल प्रोजेक्ट, स्वच्छ और सुरक्षित जल की दिशा में ऐतिहासिक कदम

देहरा (हिमाचल प्रदेश): पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने पेयजल आपूर्ति और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार ने देहरा विधानसभा क्षेत्र में देश के पहले ओजोन-आधारित जल शोधन (Ozone-based Drinking Water Purification) प्रोजेक्ट को स्थापित करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस अत्याधुनिक परियोजना का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को शत-प्रतिशत बैक्टीरिया-मुक्त, शुद्ध और सेहतमंद पीने का पानी उपलब्ध कराना है।

पारंपरिक क्लोरीनेशन से बेहतर और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक

अब तक जल शोधन के लिए पारंपरिक रूप से क्लोरीन (Chlorine) का उपयोग किया जाता रहा है, जिससे पानी के स्वाद और गंध में बदलाव आ जाता था और इसके लंबे समय तक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें भी बनी रहती थीं।

ओजोन-आधारित तकनीक इस पारंपरिक तरीके से बिल्कुल अलग और कई गुना अधिक प्रभावी है:

  • बैक्टीरिया और वायरस का खात्मा: ओजोन ($O_3$) एक शक्तिशाली ऑक्सीडेंट है, जो पानी में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस, सूक्ष्मजीवों और जैविक अशुद्धियों को सेकंडों में नष्ट कर देता है।

  • हानिकारक रसायनों से मुक्ति: इस प्रक्रिया के दौरान पानी में किसी भी प्रकार का रासायनिक अवशेष नहीं छूटता, जिससे जल प्राकृतिक रूप से ताज़ा और स्वादयुक्त बना रहता है।

  • दुर्गंध और भारी धातुओं से राहत: ओजोन गैस पानी में घुले दुर्गंध पैदा करने वाले तत्वों और अवांछित धातुओं को भी बेअसर कर देती है।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी योजना

पहाड़ी इलाकों में मानसूनी सीजन के दौरान नदियों, खड्डों और प्राकृतिक जल स्रोतों में गाद (silt) और जैविक कचरा मिलने से पानी दूषित हो जाता है, जिससे जलजनित बीमारियों (Waterborne diseases) का खतरा बढ़ जाता है। देहरा में शुरू हो रहा यह ओजोन प्रोजेक्ट इस समस्या का स्थायी समाधान बनकर उभरेगा।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: जल शक्ति विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए अत्याधुनिक ओजोनेशन प्लांट और उन्नत फ़िल्टरेशन यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं।

  • स्वचालित गुणवत्ता जांच: सप्लाई से पहले पानी के मानक और शुद्धता की जांच के लिए डिजिटल सेंसर और ऑटोमेटेड निगरानी प्रणाली लगाई जाएगी।

  • भविष्य की योजना: देहरा में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, राज्य सरकार की योजना इसे हिमाचल के अन्य प्रमुख शहरों और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भी लागू करने की है।

स्थानीय निवासियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा का नया मानक तय करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से भी एक मिसाल बनेगी।

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