पंजाब में उमस भरी गर्मी के बीच बिजली का संकट बेहद गंभीर रूप ले चुका है। एक तरफ जहां राज्य में बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, वहीं दूसरी ओर राज्य का अपना उत्पादन महज 4,472 मेगावाट के आसपास ही सीमित है। इस बड़े अंतर को पूरा करने के लिए पंजाब को पूरी तरह से नॉर्दर्न ग्रिड पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पावर प्लांट्स की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। राजपुरा थर्मल प्लांट में केवल 3 दिन और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में 7 दिन का ही कोयला बचा है। इसके अलावा, राजपुरा प्लांट की 700-700 मेगावाट क्षमता वाली दो मुख्य यूनिट्स भी तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ी हैं, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है।

जालंधर में देर रात फूटा उद्योगपतियों का गुस्सा बिजली संकट का सबसे बड़ा खामियाजा उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। जालंधर के फोकल प्वाइंट और इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़े लगभग 3,000 उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ा है। शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक लगने वाले 10-11 घंटे के कटों से परेशान होकर उद्योगपतियों ने देर रात 11:30 बजे सोडल चौक पर विरोध प्रदर्शन किया।
उद्योगपतियों का कहना है कि काम बंद होने के बावजूद उन्हें लेबर को पूरी मजदूरी और बिजली के निश्चित शुल्क चुकाने पड़ रहे हैं। बिजली कटौती से न सिर्फ उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम जनता के घरों का कामकाज और जलापूर्ति भी बुरी तरह ठप हो गई है।








